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कालसर्प योग (Kaal Sarp Yoga)


कुंडली में अक्सर कालसर्प योग की चर्चा होती है। शास्त्रों में बारह तरह के कालसर्प योग बताए गए हैं। अनंत, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पदम, महापदम, तक्षक, काकोटिक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाम। ये सभी सांप की नस्लें हैं और इनके आधार पर ही तय होता है कि किसी की कुंडली में मौजूद कालसर्प योग कितना हानिकारक है। वैसे यह भी कहा जाता है कि सांप कालसर्प दोष वाले जातकों की रक्षा भी करता है। असल में जन्मकुंडली में सभी ग्रह सहित राहु और केतु भी एक ही धुरी में बैठ जाते हैं, तब यह योग बनता है। इस योग की पहचान के दूसरे तरीके भी हैं : सपने में सांप दिखाई पड़ना, पानी से डरना, सीढ़ियों पर चढ़ने से डरना, सदैव अशुभ होने की आशंका से भयभीत रहना, अकाल मृत्यु का भय, नींद में चौंक जाना आदि से भी कालसर्प दोष का पता चल सकता है।

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