नवरात्रि में घट स्थापना का समय

इस बार नवरात्रि मे घट स्थापना सुबह 8.05 बजे...

अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच

इस कवच के जप से समस्त प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली यक्षिणी साधक के नियंत्रण मे...

Urvashi Apsara Sadhana

इस प्रकार की साधना जीवन में करना साधक का सौभाग्य ही होता हैं इसलिए प्रयास करके इस प्रकार की साधना जीवन मे जरुर करनी चाहिए क्योंकि....

Tilottama Apsara Sadhana Procudure

तिलोत्तमा अप्सरा की गिनती भी श्रेष्ठ अप्सराओं मे होती हैं। यह अप्सरा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनो ही रुप मे साधक की सहायता करती रहती हैं ....

Celestial Nymph Rambha Apsara (रम्भा अप्सरा साधना)

रम्भा अप्सरा साधना की सिद्धि प्राप्त करने पर, रम्भा उसके जीवन में हर कदम पर एक छाया के रूप में और साक्षात रुप मे ....

Menka Rambha with Urvashi Apsara Sadahna

इस साधना को समपन्न करने पर आठ अप्सराएँ एक साथ दर्शन देती हैं इस प्रकार की साधना जगत मे बहुत साधनाएँ...

Rambha Apsara Sadahna

Urvashi is considered one of the best in the Nymphs. Rambha is also an amazing, talented and skilled dancer but...

Somvati Amavasya 04-July-2016/ सोमवती अमावस्या



सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तिथि के संयोग को सोमवती अमावस्या कहते हैं। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या का जिस दिन, जिस समय, जहां वास होता है, वहां गंगा पुष्कर सहित विश्व के समस्त तीर्थ विद्यमान होते हैं। इसलिए इस दिन पवित्र नदियों में स्नान तथा पूजा-पाठ, जप-तप, यज्ञ हवन आदि शुभ कर्मों का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए प्रत्येक शुभ कार्यों का अक्षुण्ण फल मनुष्य को प्राप्त होता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने तथा पीपल वृक्ष एवं भगवान विष्णु की पूजा एवं पीपल वृक्ष की प्रदक्षिणा करने वाले मनुष्य के समस्त दैहिक, दैविक, भौतिक ताप एवं कष्ट समाप्त हो जाते हैं और वह समस्त दु:खों से मुक्त होकर स्वस्थ, सुखी, समृद्धशाली जीवन यापन करते हैं। साथ ही उनके पितरों को भी शांति प्राप्त होती है। इसलिए इस पुण्य तिथि पर हमेश अशुभ कर्मों से दूर रहकर शुभ कर्मों में संलग्न रहना चाहिए।

पूजन विधि: सूर्य उदय से सूर्य अस्त के बीच में इस प्रयोग को खाली पेट रहकर सम्पन्न करना चाहिए। पीपल के पेड के पास जाइये, पीपल का पेड ऐसा हो जिसकी प्ररिक्रमा करी जा सकती हो। अब पीपल देवता को एक जनेऊ दीजिये। ऐसा मान लें पीपल के पेड़ के नीचे विष्णु भगवान का एक चित्र रखा हैं / या भगवान विष्णु बैठे हैं। विष्णु भगवान को भी दुसरा जनेऊ अर्पित किजिए। पीपल के पेड और भगवान विष्णु को नमस्कार कर प्रार्थना कीजिये। इसके उपरांत कलावा / मौली, पीला अक्षत (हल्दी मे रंगे हुए), चंदन (यदि सम्भव हो), पीले पुष्प, धूप-दीप, दूध, दही, थोडी सी दुध की बनी मिठाई समर्पित करते हुए पूजा-अर्चना किजिए। इतना पुजन होनें के बाद पीपल की परिक्रमा करनी शुरु करें हर एक परिक्रमा के साथ थोडी सी मिठाई पीपल पर अर्पित करते हुए “यानि कानि पापानि जन्मांतर वृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यंति प्रदक्षिणे पदे पदे। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या सिर्फ  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करते रहें। 108 परिक्रमा पूरी करने के बाद पीपल के पेड और भगवान विष्णु से फिर प्रार्थना करे कि जाने अन्जाने में हुये अपराधो के लिए उनसे क्षमा किजिए।

प्रदक्षिणा करने के बाद खाद्य पदार्थों को दान में दे देना चाहिए। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन से प्रारंभ कर जो व्यक्ति हर अमावस्या या सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करता है, वह चाहे किसी भी विकट परिस्थितियों से घिरा हो, उससे मुक्त होकर सुख, सौभाग्य तथा ऐश्वर्य को प्राप्त करता है।

सोमवती अमावस्या के दिन व्यक्ति तुलसी के पौधे की धुप दीप सें पुजा करते हुए, फिर तुलसी के पौधे की परिक्रमा करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का 108 बार जप करता हैं तो उसके जीवन में धन सम्बन्धी समस्या नहीं होती। ऐसे व्यक्ति का कोई कार्य धन के अभाव से नहीं रुकता।

बाकी आपकी इच्छा!!!

Navratri April 2016



कल शुक्रवार (8 अप्रैल) से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी, जिसके आठ दिन अनुष्ठान में आदि शक्ति दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाएगी। देवी आराधना का यह पर्व 15 अप्रैल, शनिवार को समाप्त होगा।

आइए जानते हैं, आठ अप्रैल को इस पूजा के लिए कलश स्थापना या घट-स्थापना का मुहुर्त क्या है और इन नौ दिनों देवी दुर्गा के भक्त उनके किन-किन रूपों की पूजा करते हैं।

 
चैत्र नवरात्रि घट-स्थापना मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्रि की कलश स्थापना मुहूर्त 11:57 से 12:48 बजे शुभ माना गया है। यह केवल 50 मिनट्स की होगी। ध्यातव्य है कि कलश स्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि के अभिजीत मुहूर्त के दौरान निर्धारित है।

 
भारतीय समयानुसार, प्रतिपदा तिथि का प्रारम्भ 7 को अप्रैल, 2016 को 16:53 बजे से होगा और इस तिथि की समाप्ति 8 अप्रैल, 2016 को 13:05 बजे होगा।

नवरात्रि का पहला दिन : 8 अप्रैल 2016 (शुक्रवार)
घट-स्थापना के साथ नवरात्र आरम्भ, शैलपुत्री पूजा

नवरात्रि दूसरा दिन: 9 अप्रैल 2016 (शनिवार)
ब्रह्मचारिणी पूजा, चंद्रघंटा पूजा

नवरात्रि तीसरा दिन: 10 अप्रैल 2016 (रविवार)
कुष्मांडा पूजा

नवरात्रि चौथा दिन: 11 अप्रैल 2016 (सोमवार)
स्कंदमाता पूजा

नवरात्रि पांचवां दिन: 12 अप्रैल 2016 (मंगलवार)
कात्यायनी पूजा

नवरात्रि छठा दिन: 13 अप्रैल 2016 (बुधवार)
कालरात्रि पूजा

नवरात्रि सातवां दिन: 14 अप्रैल 2016 (गुरुवार)
महागौरी पूजा, दुर्गा महा अष्टमी पूजा, सरस्वती पूजा

नवरात्रि आठवां दिन: 15 अप्रैल 2016 (शुक्रवार)
राम नवमी, चैत्र नवरात्रि समाप्त।



चन्द्र ग्रहण मार्च 2016



यह चन्द्र ग्रहण और इसके बाद होने वाले सभी ग्रहण बहुत ही महत्त्वपुर्ण हैं। यह सभी ग्रहण सभी की कुंडली और जीवन को हिलाने वाले हैं। कारण बाद में सपष्ट करुंगा। अभी के लिए इतना ही कहना चाहता हूँ यदि किसी को साधना सिद्ध करनी हैं तो यह उत्तम समय हैं लेकिन साधनाए नियत से सिद्द होती हैं। अधिक जानकारी आपको समय से दी जाएगी।