नवरात्रि में घट स्थापना का समय

इस बार नवरात्रि मे घट स्थापना सुबह 8.05 बजे...

अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच

इस कवच के जप से समस्त प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली यक्षिणी साधक के नियंत्रण मे...

Urvashi Apsara Sadhana

इस प्रकार की साधना जीवन में करना साधक का सौभाग्य ही होता हैं इसलिए प्रयास करके इस प्रकार की साधना जीवन मे जरुर करनी चाहिए क्योंकि....

Tilottama Apsara Sadhana Procudure

तिलोत्तमा अप्सरा की गिनती भी श्रेष्ठ अप्सराओं मे होती हैं। यह अप्सरा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनो ही रुप मे साधक की सहायता करती रहती हैं ....

Celestial Nymph Rambha Apsara (रम्भा अप्सरा साधना)

रम्भा अप्सरा साधना की सिद्धि प्राप्त करने पर, रम्भा उसके जीवन में हर कदम पर एक छाया के रूप में और साक्षात रुप मे ....

Menka Rambha with Urvashi Apsara Sadahna

इस साधना को समपन्न करने पर आठ अप्सराएँ एक साथ दर्शन देती हैं इस प्रकार की साधना जगत मे बहुत साधनाएँ...

Rambha Apsara Sadahna

Urvashi is considered one of the best in the Nymphs. Rambha is also an amazing, talented and skilled dancer but...

04 April 2015 Chandra Grahan (चन्द्र ग्रहण)

04 अप्रैल 2015 को चन्द्र ग्रहण हैं। ग्रहण के महत्तव से सभी भालि भांति परिचित हैं। 04 अप्रैल 2015 को होने वाला चन्द्र ग्रहण भारत में दृश्य होगा। इस ग्रहण के प्रारम्भ व समाप्ति काल दिल्ली में इस प्रकार होगा।

ग्रहण प्रारम्भ - दोपहर बाद - 03.45 बजे
ग्रहण समाप्त - सांय - 07.15 बजे

ग्रहण का सूतक - इस ग्रहण का सूतक दिनांक 4 अप्रैल 2015 को प्रातः 6:45 से ही प्रारम्भ हो जायेगा। सूतक प्रारम्भ हो जाने बाद (बच्चो वृद्ध व रोगियों को छोड़कर) धार्मिक जानो को भोजन आदि नहीं करना चाहिए। इस काल में देव प्रतिमा आदिओं का स्पर्श व्रजित हैं।

इस बार चन्द्रमा ग्रस्ति अवस्था में ही उदय होगा।
चन्द्र ग्रहण प्रारम्भ (चन्द्रोदय के साथ) - 18: 41: 09
चन्द्र ग्रहण समाप्त - 19: 15: 20

स्थानीय ग्रहण की अवधि - 34 मिनट 10 सेकेंड

उपच्छाया से पहला स्पर्श - 14:33:29 
प्रच्छाया से पहला स्पर्श - 15:47:38 
परमग्रास चन्द्र ग्रहण - 17:31:29 
प्रच्छाया से अंतिम स्पर्श - 19:15:20 
उपच्छाया से अंतिम स्पर्श - 20:29:29


खण्डग्रास की अवधि - 03 घंटे 27 मिनट 42 सेकेंड
उपच्छाया की अवधि - 05 घंटे 55 मिनट 59 सेकेंड

इस दौरान गर्भवती स्त्रीयों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। साथ ही यदि हो सकें तो अपने ईष्ट देव के मंत्रों को मन ही मन जपते रहना चाहिए। गर्भवती स्त्रीयों को विशेष पुजा पाठ नहीं करनी चाहिए। साधक गण जो मंत्रों को सिद्ध करने मे विशेष रुचि रखते है उन सभी को इस समय का उपयोग करना चाहिए। यदि मंत्रों को किसी भी प्रकार के जल में खडा होकर जपा जाए तो मंत्र निश्चित रुप से सिद्धि होते है। इस बाद दान आदि करना चाहिए। यदि आपका मंत्र सिद्ध भी ना हो तो भी साधना को लगातार करते रहने से हर प्रकार का मंत्र 20-22 दिन में सिद्ध हो जाता है। लेकिन साधना क्रम टुटना नही चाहिए।

Apsara & Yakshini Sadhana Books



आप सभी जानते हैं कि सौन्दर्य का हमारे जीवन में क्या स्थान हैं। सौन्दर्य जीवन की एक श्रेष्ठत्म निधि हैं। सौन्दर्य नहीं तो जीवन में कुछ भी नहीं और ऐसा हो ही नहीं सकता कि जहाँ सौन्दर्य का जिक्र हो और अप्सराओं और यक्षिणीयों का नाम ना आयें। सच में अप्सरा सौन्दर्य साधना सहज और थोडी सी श्रम साध्य जरुर हैं लेकिन 101% सुरक्षित और पूर्ण फल देनी वाली साधना हैं। कई बार देखने में आता हैं कि यह साधना एक बार में साधना सफल नहीं होती तो दोबारा प्रयास करना चाहिए। हार नहीं माननी चाहिए। ऐसा किसी भी साधना में हो सकता हैं यह साधक अच्छी तरह जानते हैं। अप्सरा साधना से क्या होता हैं यह भी साधक अच्छी तरह जानते हैं और सभी साधना करने भी चाहते हैं, लेकिन साधना के सभी पहलू गोपनीय हैं और सभी को नहीं बताये जा सकते हैं। यह कारण है कि इस साधना के सभी पहलू एक व्यक्ति या गुरु से मिलने कठिन हो जाते हैं और जो साधना के सभी पहलू जानते हैं या तो बताते नहीं है या वो सब कहीं ना कहीं लुप्त हो जाते हैं। सच्चा साधक साधना से कुछ नहीं चाहता जो मिलता हैं प्रभु या ईष्ट का प्रसाद समझ रख लेता हैं। इसी भावना को रखते हुए यदि कोई भी साधना करी जाये तो साधना कम समय में सफल होकर पूर्ण फल प्रादन करने में सक्षम होती हैं और साधक को पूर्ण कर देती हैं।

जैसा कि हमे बार बार आप सभी साधको की ईमेल प्राप्त होती रही हैं इस सौन्दर्य साधना पर कोई पुस्तक लिखी जाये। या कभी कभी आप लोग पुछते हैं कि बाजार में ऐसी कोई पुस्तक हैं जो इन साधना का खुलासा कर सकें तो हमारा जबाब अधिकत्तर नहीं में ही होता हैं क्योंकि ऐसी कोई पुस्तक अभी मौजुद नहीं। यदा कदा किसी ग्रंथ में विवरण मिल भी जाये तो वहाँ कोई ना कोई पहलू गायब रहता कभी तो मुद्रा कभी न्यास आदि नहीं होगें। कभी तो यंत्र का चित्र नहीं होगा और कभी मंत्र अशुद्ध होगा। ऐसे में साधना कैसे पुरी हो तो कैसे हो? यह बहुत ही बडा प्रशन हैं। इंटरनेट पर भी अभी तक ऐसा कोई लेख मौजुद नहीं हैं जो सारी की सारी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध करा दें।

इस पुस्तक में हमने इस साधना से जुडे सभी गोपनीय पहलू को आपके सामने रखने का प्रयास किया जिससें सौन्दर्य में कोई कमी ना आयें और पूर्ण रुप से फलित हो सकें, ऐसा गुरु इच्छा से करने की कोशिश करी गई हैं। इस पुस्तक में सभी पहलू को रख गया हैं जैसे कि यंत्र निर्माण, यंत्र और माला की प्राण प्रतिष्ठा, प्रमाणित पुजा की विधियाँ, सौन्दर्य हवन की सामग्री और विधि, न्यास, मुद्रा,  रक्षा विधान, अप्सरा और यक्षिणीयों कि पुजा में क्या अंतर हैं......   


मेरी संतान कैसी हो? boy or girl?


कैसे हो आप सब, काफी दिन हो गये किसी पोस्ट नहीं लिख पाया, शादी शुदा जीवन की जिम्मेवारी को निभाने के वजह से ऐसा हुआ। आशा करता हूँ कि आप सब ठीक होगें

जीवन के अनुभव तो आप सब ने भी प्राप्त किये होगें, बडे ही रोचक होते हैं जीवन के खट्टे मीट्टे अनुभव। कई बार कुछ ऐसा होता हैं जो हमें पसन्द नहीं कई बार कुछ ऐसा होता है जो हमें बहुत या बहुत ही अच्छा लगता। कारण आप सब जानते ही हैं। “कर्म प्राधन विश्व राचा जो जिस किन तस फल चाखा”। अब यह मत कहना कि कहवात गलत हैं, मेरे गुरु से तो मुझे यही प्राप्त हैं।

एक समस्या मेरे और आप सब के सामने बार बार आती हैं कि मन चाही संतान कैसे हो? जैसा कि आप न्यूज आदि में सुनते हो कि कन्या भुण्र हत्या लोग करते है और करवाते हैं। यह महापाप हैं ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार भी और हम सब भी इस मामले मे सख्त होने चाहिए। कभी सोचता हूँ कि वो कैसी माँ होती होगी जो एक बच्चे को तो छाती से लगाकर दुध पिलाती होगी और दुसरे छोटे से महमान को पेट मे ही मार देती हैं। कैसी ममता है? एक को सीने से लगया और एक को समसान पुहचाया?

अगर कोई भी बहन मेरे इस सेन्दह को पढे तो ऐसा मत करना बस इतनी गुजाराशि हैं आप सब बहनो सें। मनचाही संतान पैदा करने के कई रास्ते हैं। कोई कठोर नियम नहीं केवल कुछ बातों का ध्यान रखे तो सब सम्भव हैं। पर वो बाते क्या हैं यहाँ लिखना नहीं चाहता हूँ। परेशान होने कि जरुरत नहीं हैं चाहे किसी को पहला लडका हो या लडकी इस बात से क्या फर्क पडता हैं दुसरा बच्चा जैसा चाहते हो वैसा आराम से हो जायेगा।

पर दिक्कत इस बात की हैं कि किन नियम का पालन किया जाये। मेरे मन तो बहुत हैं कि मैं इन सब बातों को यहाँ लिख सकूँ पर यह ठीक नहीं? अगर आपकी भी ऐसी समस्या हैं तो आप सम्पर्क कर सकते हैं। मैं बहुत ही साधरण नियम बताउगाँ और आपका और सामाजिक बैलेंस भी ठीक रहेगा।

आखिर मैं फिर एक बात कहुगाँ कि भुण्र हत्या महापाप हैं यह मत करना। रास्ते बहुत हैं सिर्फ यह कि हम तलाश कर पाते हैं या नहीं।

जय माते!!!!