नवरात्रि में घट स्थापना का समय

इस बार नवरात्रि मे घट स्थापना सुबह 8.05 बजे...

अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच

इस कवच के जप से समस्त प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली यक्षिणी साधक के नियंत्रण मे...

Urvashi Apsara Sadhana

इस प्रकार की साधना जीवन में करना साधक का सौभाग्य ही होता हैं इसलिए प्रयास करके इस प्रकार की साधना जीवन मे जरुर करनी चाहिए क्योंकि....

Tilottama Apsara Sadhana Procudure

तिलोत्तमा अप्सरा की गिनती भी श्रेष्ठ अप्सराओं मे होती हैं। यह अप्सरा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनो ही रुप मे साधक की सहायता करती रहती हैं ....

Celestial Nymph Rambha Apsara (रम्भा अप्सरा साधना)

रम्भा अप्सरा साधना की सिद्धि प्राप्त करने पर, रम्भा उसके जीवन में हर कदम पर एक छाया के रूप में और साक्षात रुप मे ....

Menka Rambha with Urvashi Apsara Sadahna

इस साधना को समपन्न करने पर आठ अप्सराएँ एक साथ दर्शन देती हैं इस प्रकार की साधना जगत मे बहुत साधनाएँ...

Rambha Apsara Sadahna

Urvashi is considered one of the best in the Nymphs. Rambha is also an amazing, talented and skilled dancer but...

मेरी संतान कैसी हो? boy or girl?


कैसे हो आप सब, काफी दिन हो गये किसी पोस्ट नहीं लिख पाया, शादी शुदा जीवन की जिम्मेवारी को निभाने के वजह से ऐसा हुआ। आशा करता हूँ कि आप सब ठीक होगें

जीवन के अनुभव तो आप सब ने भी प्राप्त किये होगें, बडे ही रोचक होते हैं जीवन के खट्टे मीट्टे अनुभव। कई बार कुछ ऐसा होता हैं जो हमें पसन्द नहीं कई बार कुछ ऐसा होता है जो हमें बहुत या बहुत ही अच्छा लगता। कारण आप सब जानते ही हैं। “कर्म प्राधन विश्व राचा जो जिस किन तस फल चाखा”। अब यह मत कहना कि कहवात गलत हैं, मेरे गुरु से तो मुझे यही प्राप्त हैं।

एक समस्या मेरे और आप सब के सामने बार बार आती हैं कि मन चाही संतान कैसे हो? जैसा कि आप न्यूज आदि में सुनते हो कि कन्या भुण्र हत्या लोग करते है और करवाते हैं। यह महापाप हैं ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार भी और हम सब भी इस मामले मे सख्त होने चाहिए। कभी सोचता हूँ कि वो कैसी माँ होती होगी जो एक बच्चे को तो छाती से लगाकर दुध पिलाती होगी और दुसरे छोटे से महमान को पेट मे ही मार देती हैं। कैसी ममता है? एक को सीने से लगया और एक को समसान पुहचाया?

अगर कोई भी बहन मेरे इस सेन्दह को पढे तो ऐसा मत करना बस इतनी गुजाराशि हैं आप सब बहनो सें। मनचाही संतान पैदा करने के कई रास्ते हैं। कोई कठोर नियम नहीं केवल कुछ बातों का ध्यान रखे तो सब सम्भव हैं। पर वो बाते क्या हैं यहाँ लिखना नहीं चाहता हूँ। परेशान होने कि जरुरत नहीं हैं चाहे किसी को पहला लडका हो या लडकी इस बात से क्या फर्क पडता हैं दुसरा बच्चा जैसा चाहते हो वैसा आराम से हो जायेगा।

पर दिक्कत इस बात की हैं कि किन नियम का पालन किया जाये। मेरे मन तो बहुत हैं कि मैं इन सब बातों को यहाँ लिख सकूँ पर यह ठीक नहीं? अगर आपकी भी ऐसी समस्या हैं तो आप सम्पर्क कर सकते हैं। मैं बहुत ही साधरण नियम बताउगाँ और आपका और सामाजिक बैलेंस भी ठीक रहेगा।

आखिर मैं फिर एक बात कहुगाँ कि भुण्र हत्या महापाप हैं यह मत करना। रास्ते बहुत हैं सिर्फ यह कि हम तलाश कर पाते हैं या नहीं।

जय माते!!!!  

Oct 2013 Navratri me Ghat Sathpna घट स्थापना का समय 05 अक्टूबर 2013



घट स्थापना- घट स्थापना का समय 05 अक्टूबर 2013, शनिवार को अश्रि्वन शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रात:काल 08 बजकर 05 मिनट से 09 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक के मध्य में भी घट स्थापना की जा सकती है।

Yakshini Apsara Vashikaran Kavach



अप्सरा और यक्षिणी वशीकरण कवच: 

इस नायिका कवच को यक्षिणी पुजा से पहले 1,5 या 7 बार जप किया जाना चाहिए। इस कवच के जप से किसी भी प्रकार की सुन्दरी साधना में विपरीत परिणाम प्राप्त नहीं होते और साधना में जल्द ही सिद्धि प्राप्त होती हैं। हम आशा करते हैं कि जब भी आप कोई भी यक्षिणी साधना करोगें तो इस कवच का जप अवश्य करोगें। इस कवच के जप से समस्त प्रकार की सिद्धियाँ देने वाली यक्षिणी साधक के नियंत्रण मे आ जाती हैं और साधक के सभी मनोरथो को पूर्ण करती हैं। यक्षिणी साधना से जुडा यह कवच अपने आप मे दुर्लभ हैं। इस कवच के जपने से यक्षिणीयों का वशीकरण होता हैं। तो क्या सोच रहे हैं आप........................      

।। श्री उन्मत्त-भैरव उवाच ।।

श्रृणु कल्याणि ! मद्-वाक्यं, कवचं देव-दुर्लभं। यक्षिणी-नायिकानां तु, संक्षेपात् सिद्धि-दायकं ।।
ज्ञान-मात्रेण देवशि ! सिद्धिमाप्नोति निश्चितं। यक्षिणि स्वयमायाति, कवच-ज्ञान-मात्रतः ।।
सर्वत्र दुर्लभं देवि ! डामरेषु प्रकाशितं। पठनात् धारणान्मर्त्यो, यक्षिणी-वशमानयेत् ।।

विनियोगः- ॐ अस्य श्रीयक्षिणी-कवचस्य श्री गर्ग ऋषिः, गायत्री छन्दः, श्री अमुकी यक्षिणी देवता, साक्षात् सिद्धि-समृद्धयर्थे पाठे विनियोगः।

ऋष्यादिन्यासः- श्रीगर्ग ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छन्दसे नमः मुखे, श्री रतिप्रिया यक्षिणी देवतायै नमः हृदि, साक्षात् सिद्धि-समृद्धयर्थे पाठे विनियोगाय नमः सर्वांगे।

।। मूल पाठ ।।
शिरो मे यक्षिणी पातु, ललाटं यक्ष-कन्यका। 
 मुखं श्री धनदा पातु, कर्णौ मे कुल-नायिका ।।
चक्षुषी वरदा पातु, नासिकां भक्त-वत्सला। 
 केशाग्रं पिंगला पातु, धनदा श्रीमहेश्वरी ।।
स्कन्धौ कुलालपा पातु, गलं मे कमलानना। 
किरातिनी सदा पातु, भुज-युग्मं जटेश्वरी ।।
विकृतास्या सदा पातु, महा-वज्र-प्रिया मम। 
अस्त्र-हस्ता पातु नित्यं, पृष्ठमुदर-देशकम् ।।
भेरुण्डा माकरी देवी, हृदयं पातु सर्वदा। 
अलंकारान्विता पातु, नितम्ब-स्थलं दया ।।
धार्मिका गुह्यदेशं मे, पाद-युग्मं सुरांगना। 
शून्यागारे सदा पातु, मन्त्र-माता-स्वरुपिणी ।।
निष्कलंका सदा पातु, चाम्बुवत्यखिलं तनुं। 
प्रान्तरे धनदा पातु, निज-बीज-प्रकाशिनी ।।
लक्ष्मी-बीजात्मिका पातु, खड्ग-हस्ता श्मशानके। 
शून्यागारे नदी-तीरे, महा-यक्षेश-कन्यका।।
पातु मां वरदाख्या मे, सर्वांगं पातु मोहिनी। 
महा-संकट-मध्ये तु, संग्रामे रिपु-सञ्चये ।।
क्रोध-रुपा सदा पातु, महा-देव निषेविका। 
सर्वत्र सर्वदा पातु, भवानी कुल-दायिका ।।
इत्येतत् कवचं देवि ! महा-यक्षिणी-प्रीतिवं। 
अस्यापि स्मरणादेव, राजत्वं लभतेऽचिरात्।।
पञ्च-वर्ष-सहस्राणि, स्थिरो भवति भू-तले। 
वेद-ज्ञानी सर्व-शास्त्र-वेत्ता भवति निश्चितम्।
अरण्ये सिद्धिमाप्नोति, महा-कवच-पाठतः। 
यक्षिणी कुल-विद्या च, समायाति सु-सिद्धदा।।
अणिमा-लघिमा-प्राप्तिः सुख-सिद्धि-फलं लभेत्। 
पठित्वा धारयित्वा च, निर्जनेऽरण्यमन्तरे।।
स्थित्वा जपेल्लक्ष-मन्त्र मिष्ट-सिद्धिं लभेन्निशि। 
भार्या भवति सा देवी, महा-कवच-पाठतः।।
ग्रहणादेव सिद्धिः स्यान्, नात्र कार्या विचारणा ।।

।। हरि ॐ तत्सत ।।