स्फटिक
अगर आपके मन में हमेशा नकारात्मक भाव आते हैं या मन अशांत रहता है, तो आपके लिए स्फटिक की माला धारण करना लाभप्रद हो सकता है। भारतीय ज्योतिष के अनुसार यह व्यक्ति के आसपास से सारे नकारात्मक भावों को दूर कर देता है।
धार्मिक कथाओं में स्फटिक का विवरण मिलता है। रामायण काल में भगवान राम और लक्ष्मण स्फटिक की चट्टान पर बैठते थे। भगवान शिव की आराधना के लिए उन्होंने इसी धातु का शिवलिंग बनाया था। इसी शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग कहा गया है। मान्यता यह भी है कि स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा जिस घर में की जाती है, वहां संपन्नता और खुशियां हमेशा बनी रहती हैं।
वैसे यह ऊर्जा का भी अच्छा स्रोत है। इसलिए इसकी माला धारण करने वाले लोग हमेशा ऊर्जावान बने रहते हैं। इसमें पॉजिटिव एनर्जी को मानव शरीर में एकत्र करके डर और गुस्से को दूर करने की अद्भुत क्षमता होती है। मैगनेट की तरह स्फटिक भी अपने चारों ओर एक चुंबकीय तरंगों का घेरा बनाता है, जो कि सारी नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके आसपास के लोगों को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।
इसे धारण करने से व्यक्तित्व भी आकर्षक होता है और जीवन को आनंद से जीने की उमंग भी देता है। स्फटिक की माला का उपयोग मां लक्ष्मी, दुर्गा, सरस्वती आदि की आराधना के लिए किया जाता है। स्फटिक का संबंध शुक्र ग्रह से होता है और आमतौर पर इसका इस्तेमाल हीरे के विकल्प के रूप में किया जाता है। इसमें मौजूद कई विशेष खूबियां इसे, दूसरे पत्थरों से महत्वपूर्ण बना देती हैं
ati uttam guru g
ReplyDeleteravinder singh mandi gobindgarh
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