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सूर्य को जल अर्घ्य देना महापुण्य


सूर्य देव की पूजा का शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। एक लाख दुधारू गायों के दान का जो फल होता है, उससे भी बढ़कर फल एक दिन की सूर्य पूजा से होता है। अगर कोई व्यक्ति सूर्य के बारह नामों के द्वारा होने वाले बारह नमस्कारों का नियमित अभ्यास करता है, तो उसे सूर्य देव की कृपा मिल सकती है। सूर्य को अर्घ्य देना भी लाभप्रद माना गया। इससे पहले इस मंत्र से संकल्प लें

ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: अद्य...(अपना नाम बोले)...अहं 
श्री परमात्म प्रीत्यर्थं मादिव्यस्य द्वादश नमस्काराख्यं कर्म करिष

संकल्प के बाद अंजलि या ताम्रपात्र में लाल चंदन, अक्षत, फू ल आदि डालकर हाथों को हृदय के पास लाकर निम्नलिखित मंत्र से सूर्य को अर्घ्य दें।

एहि सूर्य, सहस्रांशो, तेजोराशे जगत्पते
अनुकंपय मां भक्त्या गृहाणर्थं दिवाकर।

इसके बाद सूर्य मंडल में स्थित भगवान नारायण का उपरोक्त मंत्र से ध्यान करें।


ध्येय: सदा सवितृमंडलमध्यवर्ती। 
नारायण: सरसिजासन संनिविष्ट:।
केयूरवान मकरकुंडलवान् किरीटी। 
हारी हिरण्यमयवपुर्धुतशंक चक्र:।

तत्पश्चात सूर्य के बारह नाम लेकर उन्हें प्रणाम करें। साथ ही सूर्य के सारथि अरुण को भी अर्घ्य दें।

2 comments:

  1. namaskar mahesh ji
    mein Ravindar kal hee aap ki site dekhi aur apki site par itni jaankri wale blog padkar bahut khushi huee ki aap jaise acche log is parkaar ka gyan batane ke liye abhi bhi hai is dhara par.ji agar aap sury dev ke bare mein aur jankari dene ki kirpa kare
    apka shubchintak
    Ravindar

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  2. namaskar mahesh ji
    mein Ravindar aap ko pranam karta hun ,mein aap se ek problem ka solution puchana chahata hun.ki humare ek bade bhai hai unke head ke baal gir rahe hai agar iske liye koi upaye ya mantra ho to batane ki kirpa kare jis baal aane ki sambhavana ho
    meri e-mail id prithviraj.thakur@gmail.com

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