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शनि को शांत करें

पुजा सामग्रीः- एक लोटा खाली, कच्चा दुध, जल, शक्कर, सात प्रकार के धान (शनि के लिये बाजार मे उपलब्ध हैं), काले तिल, मधु (शहद शनि को अति प्रिय हैं) 

प्रयोगः- लोटे मे जल लेकर कच्चा दुध मिला ले, अब थोडा थोडा मधु, शक्कर, काला तिल, सप्त धान मिला ले और मन ही मन मे कोई भी शनि मंत्र जपते रहे। फिर शनि मन्दिर मे पीपल के वक्ष की सात बार परिक्रमा करते हुये मन ही मन मे सभी पापो के नाश की कामना करते रहे। परिक्रमा पुरी होने पर शनि का (वेदिक मंत्र से) ध्यान करते हुये इस जल को चढाये। अब एक अपराधी की भांति अपने दोनो हाथो को अपनी कमर के पीछे रखे और बांध ले। मन मे वही घबराहट लाये जो एक अपराधी के मन मे होती हैं। जिस स्थान पर जल दिया हैं अपने घुटने मोडते हुये बेठ जाये और वहाँ माथा टिकाये। अब खडे हो जाओ फिर जल से गीली मिट्टी अपने माथे पर लगाये। सोचो मानो अमृत मिल गया हो फिर कामना करो कि शनि देव मेरे किये हुये पापो को सामाप्त कर रहे है या यह समझो कि बस पाप सामाप्त हो चुके। अब अपना लोटा लेकर सीधे घर आ जाओ। एक बार याद रहे कि पीछे मुड्कर मत देखना वरना तुम्हारे पाप फिर वापस आ जायेगे। क्योंकि तुम जिन पापो को इस प्रयोग के द्वारा पीपल के पेड के नीचे छोड़ आये थे वह तुम्हारा पीछा करेंगे यदि पीछे देखा तो वापस गले पड जायेगे। इसलिये पीछे देखने का अकसर निर्देश कही कही मिलता हैं जहाँ निर्देशित किया जाये वहाँ पीछे नहीं देखना चाहिये वरना वो चीज़ फिर पीछे लग जाती हैं। दुसरी बात यह की किसी को साथ मत लेकर जाना चाहे परिवार का ही क्यों ना हो। तीसरी बात यह कि आते-जाते समय किसी से बात मत करना क्योंकि बात करने से भी पुजा फल दुसरे व्यकिति को मिल जाता हैं। फिर तुम्हारे पास का बचा कद्दू। और यदि कोई गलती पीछे कही तीन बातों में से हो भी जाये तो उसी शाम को यह प्रयोग फिर करें। हाँ यदि नहीं करा तो तुम्हारी दिनो वाली गनती फिर जीरो हो जायेगी। मतलब अगले शनिवार जब यह प्रयोग करोगे तो वो पहला दिन हो जायेगा। घर आने के बाद हो सके तो काली गाय (या कोई भी) को बिना नमक का कुछ खिलाये या किसी जरुरतमन्द को अन्न (कुछ अन्न का बना मिठा जैसे लड्डू), वस्त्र (कुछ ना हो तो काला रुमाल हो), दक्षिणा दे (दक्षिणा रु इसलिये देते हैं क्योंकि पैसे देखकर हर कोई सामान ले लेता हैं शायद छोटा सा लालच हैं)। यदि दान से पहले या बाद मे शनि चालिसा या शनि स्त्रोत्र या शनि भार्या (पत्नी) स्त्रोत्र या “ॐ शं शनिश्चराये नमः” का 108 बार जाप कर ले तो मज़ा ही आजेगा। या दिल करें तो जितना इन सब मे से कर सको उतना कर लेना। 

यह प्रयोग यदि आठ या ग्यारह शनिवार कर दिया तो जिन्दगी बदल जायेगी। निर्धनता समाप्त होकर सभी प्रकार के सुख का आन्नद मिलेगा। माँ लक्ष्मी ने श्री शनि जी को एक बार वचन दिया था कि जिस पर तुम प्रसन्न रहोगे मैं सदा वहाँ वास करूंगी। और जिससे तुम अप्रसन्न रहोगे मैं वहाँ से चली जाऊगीं। यदि हर अमावस्या को अपने भोजन करने से पहले अपने पित्तरो (खानदान मे मरे हुये लोगो) को याद कर लिया जाये थोडा सा मिठा-मिठाई उन के नाम से गाय को खिला दी जाये या कहीँ छत पर रख दी जाये थोडा सा जल सुर्या को दे दिया जाये यह सोचते हुये कि मेरे पित्तरो तक पहुँचा देना, तो पित्तर प्रसन्न रहते हैं। क्योकि बुजर्गो का आशीर्वाद हर मुसीबत से बचाय रखता हैं। यदि आप अपने पित्तरो को अमावस्या पर याद नहीं करते तो नवग्रह से पहले वो ही आपके कामो को बिगड देते हैं। और अनेको मुशीबत का सामना करना पडता हैं केई बार तो संतान भी नहीं होती या संतान होती भी हैं तो उसका होना या ना होना एक बराबर होता हैं। पीपल को जल देने से शनि के साथ साथ पित्तरो को भी प्रसन्नता होती हैं।

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