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Ram Krishna Paramhans

रामकृष्‍ण परमहंस एक महान संत और काली भक्त:

महान संतों में रामकृष्‍ण परमहंस का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। ये सर्वधर्म एकता में विश्वास रखते थे। बचपन से ही इनको विश्वास था कि ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं, इसलिए ईश्वर की प्राप्ति के लिए उन्होंने जीवन भर कठोर साधना और भक्ति की। 

इन्हें आध्यात्मिक साधनाओं के क्षेत्र में उच्चकोटि का योगी, तपस्वी एवं अवतारी महापुरुष माना जाता है। वे दिन-रात देवी की आराधना करते, ध्‍यान करते और देवी के दर्शन करने के लिए फूट-फूट कर रोते। अंतत: उन्‍हें देवी का दर्शन मिला। इसके बाद अपनी आध्यात्मिक साधनाओं में उन्‍होंने हिंदू धर्म के साथ इस्‍लाम धर्म और ईसाई धर्म के नियमों का पालन करते हुए, ईश्‍वर का साक्षात्‍कार किया और आध्‍यात्मिक आनंद का अनुभव किया। आज हर तरफ जब मानवता संवेदनहीन हो रही है, तो ऐसे में इनके विचार उपयोगी हैं। आज हम आपसी रिश्तों में अहंकार को महत्वपूर्ण मानकर उसे बढ़ाते रहते हैं, लेकिन रामकृष्ण परमहंस अहंकार के नाश के लिए कभी झाड़ू लेकर शौचालय साफ करते, कभी भिखारियों की जूठी पत्तल उठाते थे। वे दीन-दुखियों की सेवा को ही सच्ची पूजा मानते थे। हम आज भी छुआछूत, जात-पात में भेद रखते हैं, जबकि परमहंस इन सबके परे थे। तोतापुरी नाम के एक सिद्ध महापुरुष कहीं भी तीन दिन से अधिक नहीं ठहरते थे, किन्तु रामकृष्ण के गुणों से आकृष्ट होकर वे उनके साथ ग्यारह महीने रह गए थे। परमहंस का कहना था कि 'गरीबों और भूखों में ही भगवान है। हमारा धर्म है कि हम देश की गरीबी दूर करें, गिरे हुओं को ऊपर उठाएं, सबकी सेवा करें। वह धर्म जो गरीब के मुंह से दाना छीन लेता है, धर्म नहीं अधर्म है।'

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